Saturday, 13 September 2025

निवडक ओशो वचने

भज गोंविंदम मुढ़मते (आदि शंक्राचार्य) प्रवचन--04


१. सिर्फ ज्ञानी ही मानते हैं कि वे ज्ञानी नहीं हैं, अज्ञानी तो सभी मानते हैं कि वे ज्ञानी हैं। अज्ञानी तो बड़ी अकड़ से संघर्ष करता है अपने ज्ञान का। वह तो मानने को राजी नहीं होता है कि मैं नहीं जानता हूं।

२. सुबह ध्यान जब करोगे तो क्रोध को बाहर निकाल दोगे और दिन भर बाजार में क्रोध को फिर इकट्ठा कर लोगे। यह तो ऐसा हुआ कि किसी आदमी ने दिन भर कुआं खोदा और रात भर मजदूर लगा कर उसे वापस पुरवा दिया; फिर दूसरे दिन सुबह कुएं को खोदना शुरू कर दिया।

३. तुम जाते हो मंदिर में परमात्मा का स्मरण करने और मंदिर में भी बैठ कर बाजार का स्मरण करते हो। जरूरत ही न थी जाने की; बाजार में ही बैठ सकते थे। लेकिन तुम्हारी तकलीफ यह है कि जब तुम दुकान पर बैठते हो, तब मंदिर की याद भी आती है; पर जब तुम मंदिर में होते हो, तब दुकान की याद आती है।

४. अंधेरे को हटाने से थोड़े ही प्रकाश पैदा होता है, प्रकाश आ जाए तो अंधेरा हटता है।

५. संन्यास वही है, जो पीछे लौट कर न देखे; पीछे लौट कर देखा तो संन्यास अधकचरा है।

६. तुम्हारे भीतर उतना ही शुद्ध जल है, जितना महावीर, बुद्ध, शंकर के भीतर है। 

७. न तो कोई औषधि औषधि है, न कोई जहर जहर है। जो जहर तालमेल खा जाए, औषधि बन जाता है; जो औषधि तालमेल न खाए, जहर हो जाती है। 

८. धर्म बपौती नहीं है और किसी को वंशक्रम से नहीं मिलता। धर्म प्रत्येक व्यक्ति की निजी उपलब्धि है और अपनी साधना से मिलता है। - महावीर या महाविनास--(प्रवचन-01) 

९. कोई व्यक्ति ईसाई घर में पैदा हो जाने से क्राइस्ट से संबंधित नहीं होता। और कोई व्यक्ति जैन घर में पैदा हो जाने से महावीर से संबंधित नहीं होता। कोई व्यक्ति हिंदू घर में पैदा हो जाने से कृष्ण से संबंधित नहीं होता। यह बात इतनी सस्ती नहीं है। धर्म से संबंधित होना जीवन का सबसे मंहगा सौदा है। - महावीर या महाविनास--(प्रवचन-01) 

१०. आपके जन्म से नहीं, आपके मर जाने से आप धर्म से संबंधित होंगे। आपके किसी घर में पैदा हो जाने से नहीं, आपकी संपूर्ण अहंता को लेकर अगर आप मर सकेंगे, तो आप धर्म से संबंधित हो जाएंगे। - महावीर या महाविनास--(प्रवचन-01) 

११. ज्ञानी कभी हिंदू, मुसलमान, ईसाई नहीं हुआ। और भीड़ सदा हिंदू, मुसलमान ईसाई की है। - बिन घन परत फुहार—प्रवचन-08

१२. प्रेमी अकेले में मिलना चाहते हैं, बाजार में नहीं। और अगर प्रेमी बाजार में भी मिलें, तो बाजार को भूल जाते हैं, अकेले हो जाते हैं। - बिन घन परत फुहार—प्रवचन-07

 

 

 

 

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