Thursday, 13 March 2025
नेपोलियनो, हिटलरों के अहंकार भर जाते
अहंकार के साथ हम दो काम करते हैं, हजारों वर्ष से करते रहे हैं। एक काम तो है अहंकार को भरने का। उसकी कथा वही है जो उस भिक्षु की कथा है और उसके पात्र की। भरते हैं, भरते हैं, भरते हैं, भरते-भरते खुद मिट जाते हैं और पाते हैं कि अहंकार नहीं भरा, वह वहीं का वहीं, उतना का उतना, वैसा का वैसा खाली है। क्या आप सोचते हैं, सिकंदरों, नेपोलियनों, हिटलरों के अहंकार भर जाते हैं? नहीं। सिकंदर ने मरने के पहले दुख जाहिर किया था। उसने कहा था कि मैं बहुत दुखी हूं, भगवान बहुत अजीब है, इसने केवल एक ही दुनिया बनाई, कम से कम दो तो बनानी थीं, ताकि कोई आदमी जीतना चाहे तो दो दुनिया जीत सके। एक ही दुनिया! केवल एक दुनिया है जीतने को!
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